सिंचाई का पानी बना किसानों का सहारा, घोंघा और अरपा-भैंसाझार से खेती को मिला संबल

घोंघा से 49 गांवों के खेतों तक पहुंच रहा पानी, अरपा-भैंसाझार से बढ़ रहा सिंचित क्षेत्र

बिलासपुर. खेती के लिए समय पर पानी की उपलब्धता किसानों की बड़ी जरूरत है। जिले में घोंघा मध्यम जलाशय और अरपा-भैंसाझार बैराज परियोजनाएं इस जरूरत को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। नहरों के माध्यम से खेतों तक पहुंचता पानी किसानों की मेहनत को संबल दे रहा है। जल संसाधन विभाग द्वारा संचालित इन परियोजनाओं से क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार हो रहा है।
कोटा विकासखंड के ग्राम पटैता में निर्मित घोंघा मध्यम जलाशय परियोजना क्षेत्र के 49 गांवों के किसानों के लिए सिंचाई का प्रमुख आधार है। परियोजना से 8,343 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। लगभग 104.20 किलोमीटर लंबी मुख्य, शाखा एवं वितरक नहरों के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचाया जा रहा है। वर्ष 1979 में शुरू हुई इस परियोजना का निर्माण वर्ष 1981 में पूर्ण हुआ था। जलाशय की जलभराव क्षमता 3 करोड़ 7 लाख घन मीटर है। यहां मत्स्य पालन से स्थानीय लोगों को आजीविका के अवसर भी मिल रहे हैं। अरपा-भैंसाझार बैराज परियोजना से भी किसानों को सिंचाई का लाभ मिल रहा है। वर्ष 2025-26 में परियोजना के माध्यम से 13,165 हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई की गई। वर्ष 2026-27 में 17,900 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का लक्ष्य रखा गया है। इस प्रकार पिछले वर्ष की तुलना में 4,735 हेक्टेयर अधिक कृषि भूमि तक सिंचाई सुविधा पहुंचाने का लक्ष्य है। परियोजना की कुल सिंचाई क्षमता 25 हजार हेक्टेयर है।
कोटा विकासखंड में निर्मित अरपा-भैंसाझार परियोजना के सिंचाई संबंधी निर्माण कार्य वर्ष 2019 में पूर्ण हुए। परियोजना का जलग्रहण क्षेत्र लगभग 1,693.86 वर्ग किलोमीटर है। इसमें 56.640 किलोमीटर मुख्य नहर, 102.600 किलोमीटर वितरक नहर और 21.130 किलोमीटर शाखा नहर की व्यवस्था है। इन नहरों के माध्यम से कृषि भूमि तक पानी पहुंचाकर सिंचाई की जरूरत पूरी की जा रही है। घोंघा और अरपा-भैंसाझार परियोजनाएं खेतों की सिंचाई के साथ जल संसाधनों के बेहतर उपयोग का माध्यम बन रही हैं। इनसे किसानों को खेती के लिए पानी उपलब्ध हो रहा है और क्षेत्र में कृषि गतिविधियों को बल मिल रहा है।

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