आत्मनिर्भरता की मिसाल: औराटोला बना बालोद का पहला लखपति दीदी ग्राम
रायपुर. राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘‘बिहान’’ अंतर्गत स्व-सहायता समूह की महिलाओं को विभिन्न आजीविका मूलक गतिविधियों से जोड़कर उनके परिवार की वार्षिक आय 01 लाख रूपये या उससे अधिक आय अर्जित करने में सक्षम बनाकर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। जिसके तहत् बालोद जिले में 20 हजार 982 लखपति दीदी बनायी गई है। इसके विस्तृत स्वरूप में लखपति ग्राम की अवधारणा भी विकसित की गई है जो कि ग्रामीण विकास की एक ऐसी दूरदर्शी सोच है, जिसके केंद्र में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आर्थिक उन्नति है। बालोद जिले में इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गाँव का प्रत्येक परिवार सालाना कम से कम 01 लाख रुपये या उससे अधिक की शुद्ध आय अर्जित कर सके। यहाँ इस अवधारणा के निम्न मुख्य पहलुओं को लेकर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं विभागीय उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में बालोद जिले में कार्य कराया जा रहा है। लखपति ग्राम का लक्ष्य केवल गरीबी रेखा से बाहर निकलना नहीं है बल्कि ग्रामीण परिवारों को ’लखपति दीदी’ के रूप में विकसित करके उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। यह स्थायी आजीविका और बेहतर जीवन स्तर पर केंद्रित है जिसके तहत् बहुआयामी आजीविका स्त्रोत को प्राथमिकता दी गई जिसमें एक परिवार केवल एक स्त्रोत जैसे सिर्फ खेती पर निर्भर रहकर लखपति नहीं बन सकता। इसके लिए 03-04 विभिन्न आय के स्रोतों को अपनाया गया है। उन्नत कृषि अंतर्गत जैसे बेमौसमी सब्जियाँ, नकदी फसलें और जैविक खेत, पशुपालन अंतर्गत डेयरी, बकरी पालन, मुर्गी पालन या मत्स्य पालन, गैर कृषि उद्यम अंतर्गत मशरूम उत्पादन, सिलाई या छोटे ग्रामीण उद्योग, कौशल विकास अंतर्गत प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत तकनीकी प्रशिक्षण शामिल है।


