कला समाज को संवेदनशील, सृजनशील और संस्कारित बनाती है : डॉ.  पाठक 

 

विश्व कला दिवस पर प्रयास प्रकाशन साहित्य अकादमी का गरिमामय आयोजन संपन्न

बिलासपुर। प्रयास प्रकाशन साहित्य अकादमी, बिलासपुर द्वारा विश्व कला दिवस के अवसर पर एक गरिमामय एवं प्रेरणास्पद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कला, साहित्य और संस्कृति के विविध आयामों पर सार्थक चर्चा हुई तथा कला की सामाजिक उपयोगिता, रचनात्मकता और मानवीय संवेदनाओं में उसकी भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार पाठक ने अपने उद्बोधन में कहा कि कला मनुष्य की आत्मा की अभिव्यक्ति है। यह केवल सौंदर्य-बोध का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को संवेदनशील, सृजनशील और संस्कारित बनाने वाली शक्ति है। उन्होंने कहा कि विश्व कला दिवस जैसे आयोजन कला के प्रति नई पीढ़ी में जागरूकता और सम्मान का भाव उत्पन्न करते हैं तथा सांस्कृतिक चेतना को मजबूत बनाते हैं।
डॉ. राघवेंद्र दुबे अध्यक्ष अकादमी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि साहित्य और कला किसी भी सभ्य समाज की आत्मा होते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से न केवल कला का सम्मान होता है, बल्कि सृजनधर्मिता को भी नई दिशा मिलती है। उन्होंने अकादमी की ओर से भविष्य में भी साहित्य और कला के संवर्धन हेतु निरंतर ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ विनोद कुमार वर्मा, डॉ. रमेश चंद्र श्रीवास्तव एवं विष्णु कुमार तिवारी ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से आयोजन को समृद्ध किया। अतिथियों ने भी कला और साहित्य के अंतर्संबंधों पर अपने विचार रखे और इस प्रकार के आयोजनों को समय की आवश्यकता बताया।
कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावशाली संचालन डॉ. विवेक तिवारी द्वारा किया गया।
इस अवसर पर डॉ मंतराम यादव, डॉ. शत्रुघ्न जेसवानी, शीतल प्रसाद पाटनवार, राजेश सोनार, डॉ गजेंद्र तिवारी, डॉ अंकुर शुक्ला, डॉ के के दुबे, श्रीमती वसंती वर्मा, डॉ. आशीष श्रीवास सहित अकादमी के अनेक सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे कला एवं साहित्य के संवर्धन की दिशा में एक सार्थक और प्रेरणादायी पहल बताया।
अंत में अकादमी की ओर से सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं उपस्थित सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

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