कांग्रेसियों ने बैलगाड़ी और पदयात्रा निकालकर कलेक्टर कार्यालय का किया घेराव

खाद-बीज की किल्लत और कुप्रबंधन के खिलाफ सीएम के नाम सौंपा 9 सूत्रीय मांग पत्र

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही किसानों को आ रही तीव्र व्यावहारिक दिक्कतों, सरकारी नियंत्रण और प्रशासनिक कुप्रबंधन के विरोध में मंगलवार को बिलासपुर में आक्रोश का सैलाब उमड़ पड़ा। जिला कांग्रेस कमेटी बिलासपुर (ग्रामीण) व जिला किसान कांग्रेस कमेटी (शहर-ग्रामीण) के संयुक्त तत्वावधान में छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन के तहत कलेक्ट्रेट का घेराव किया गया और मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को 9 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा गया।
सुबह 11 बजे जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित एक रणनीतिक बैठक के बाद, तमाम दिग्गज नेताओं और हजारों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में रैली निकाली गई। आंदोलन में कांग्रेस नेता, पदाधिकारी और क्षेत्र के पीडि़त किसान पारंपरिक अंदाज में बैलगाडिय़ों पर सवार होकर और पदयात्रा करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। आंदोलनकारियों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, जिससे पूरा प्रशासनिक अमला अलर्ट मोड पर आ गया। किसान आंदोलन और रणनीतिक बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने एकजुटता दिखाई। विधायक कोटा अटल श्रीवास्तव, जिला अध्यक्ष बिलासपुर ग्रामीण महेंद्र गंगोत्री, वरिष्ठ नेता व पूर्व विधायक सियाराम कौशिक, राजेंद्र साहू, विजय केसरवानी, राजेंद्र शुक्ला, पूर्व महापौर रामशरण यादव, प्रमोद नायक और आत्मजीत मक्कड़ उपस्थित रहे।

ये है आंदोलन की 9 सूत्रीय मांगें
– खरीफ सीजन के लिए प्रति एकड़ मात्र 1 बोरी खाद की पात्रता का नियम पूरी तरह से अव्यावहारिक है। इसे निरस्त कर वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप पर्याप्त खाद दी जाए।
– 5 एकड़ से अधिक भूमि वाले किसानों को तीन किश्तों में खाद देने का नियम बंद कर छोटे-बड़े सभी किसानों को एकमुश्त खाद मिले और सुपर फ्लॉप टोकन व्यवस्था को तुरंत बंद किया जाए।
– खाद की मात्रा का सही आकलन केवल किसान ही कर सकता है, न कि सरकार। अत: सोसायटियों से खाद-बीज उठाने पर लगाया गया प्रशासनिक नियंत्रण तत्काल हटाया जाए।
– ग्रामीण क्षेत्रों के पेट्रोल पंपों में किसानों के लिए डीजल लेने के लिए भारी-भरकम ट्रैक्टर को स्वयं लाना अनिवार्य करना और मात्र 1,000 का डीजल देना सरासर अन्याय है। किसानों को पूर्व की भांति जरकिन (कैन,डब्बों) में डीजल की सुलभ आपूर्ति की अनुमति दी जाए।
– ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों होने वाली अघोषित बिजली कटौती से सिंचाई व्यवस्था ठप हो चुकी है। कृषि पंपों के लिए बिजली को पूर्णत: मुफ्त किया जाए।
– खाद के कृत्रिम संकट का लाभ उठाकर खुले बाजार में हो रही जमाखोरी पर रोक लगाई जाए, निजी दुकानदारों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो और पूरे प्रदेश में खाद की एक समान पारदर्शी दर लागू हो।
– सहकारी सोसायटियों द्वारा मिलने वाले कृषि ऋण की व्यवस्था (70प्रतिशत नकद और 30 प्रतिशत खाद) अत्यंत जटिल है, इसे सरल बनाकर ऋण सीमा को 40,000 प्रति एकड़ सुनिश्चित किया जाए।
-प्रदेश के किसानों को 3100 प्रति क्विंटल की दर से बोनस राशि सहित, पिछले 3 वर्षों की एमएसपी की अंतर राशि को जोडक़र, इस वर्ष का पूरा पैसा एकमुश्त दिया जाए।
– उद्यानिकी, कृषि और पशुपालन विभाग की योजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए लॉटरी प्रक्रिया अपनाई जाए और वर्ष 2026-27 के किसानों की लंबित सब्सीडी राशि तत्काल जारी की जाए।

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