एनटीपीसी में सुरक्षा मानकों की उड़ी धज्जियां, करंट की चपेट में आने से संविदा कर्मी की मौत

 

बिलासपुर। एनटीपीसी सीपत के राखड़ डेम में चल रहे ड्रेजिंग कार्य के दौरान एक बार फिर प्रबंधन और ठेका कंपनी की बड़ी लापरवाही सामने आई है, जिसने एक मासूम और युवा संविदा कर्मी की जान ले ली। इस मामले में पुलिस मर्ग कायम कर जांच कर रही है।
सीपत पुलिस ने बताया कि पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के मांगी टोला का रहने वाला 19 वर्षीय नूर मोहम्मद पिता सेनौल एसके, आईएमएस शिपमेंट एजेंसी में संविदा कर्मी के रूप में काम कर रहा था। सोमवार सुबह ग्राम रांक स्थित ऐश डाइक-1 के ओवरफ्लो लैगून क्षेत्र में स्थापित पानी के पंप पर ड्यूटी करते समय वह अचानक तड़पते हुए करंट की चपेट में आ गया और मौके पर ही उसने दम तोड़ दिया। सुबह करीब 8.45 बजे जब एनटीपीसी सीआईएसएफ के जवानों ने जलाशय क्षेत्र में तैरता हुआ शव देखा, तब जाकर इस खौफनाक हादसे का खुलासा हुआ और पूरे महकमे में हडक़ंप मच गया। सूचना मिलते ही सीपत थाना प्रभारी राजेश मिश्रा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और जलाशय के दूसरे छोर से नाव के जरिए शव को बाहर निकाला गया। टीआई राजेश मिश्रा ने साफ किया है कि प्रारंभिक जांच में मामला पूरी तरह से करंट लगने से मौत का लग रहा है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद वास्तविक कारणों की पुष्टि होगी। पुलिस ने पंचनामा कर शव को मर्चुरी भेज दिया है।

एनटीपीसी प्रबंधन पर उठा सवाल
इस हादसे ने ठेका कंपनी आईएमएस शिपमेंट एजेंसी और एनटीपीसी प्रबंधन को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि इतने जोखिमपूर्ण कार्यस्थल पर विद्युत उपकरणों की नियमित जांच क्यों नहीं की गई? क्या चंद रुपयों के लालच में श्रमिक को बिना किसी सुरक्षा उपकरणों (पीपीई किट) के मौत के कुएं में धकेल दिया गया था? औद्योगिक क्षेत्रों में संविदा कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर किए जाने वाले बड़े-बड़े दावे इस घटना के बाद पूरी तरह खोखले साबित हुए हैं।

 

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