शिक्षा माफियाओं पर कब होगी कार्रवाई? सड़क पर उतरी आम जनता
“शिक्षा के मंदिर बन चुके हैं अब महज़ मुनाफे के बाजार,
डिग्री बांटकर कर रहे हैं, युवा पीढ़ी के सपनों का संहार।”
“ज्ञान का उजाला देने के बजाय, अंधकार में धकेल रहे हैं,
नैतिकता को ताक पर रखकर, भविष्य की नींव हिला रहे हैं।”
बिलासपुर. शासन प्रशासन की निगरानी में संचालित हो रहे स्कूल की मनमानी ने सारी व्यवस्था को रददी की टोकरी में डाल दिया है, इस बात में कोई दो राय नहीं है उच्च शिक्षा देने के नाम पर शहर में वर्षो से निजी स्कूल के संचालक जमकर घोटाला कर रहे हैं कोई भी नेता और जन प्रतिनिधि इन स्कूल संचालकों के खिलाफ मेें नहीं है जिसके चलते इनका हौसला बढ़ा हुआ है , शिक्षा विभाग को अपने कब्जे में रखने वाले स्कूल संचालकों की मनमानी किसी से छिपी नहीं है कापी किताब डेस और मोटी राशि फीस के रूम में देते देते लोग कंगाल हो गए इसके बाद भी शिक्षा माफियाओं के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
धान के कटोरा की पहचान रखने वाले इस राज्य में तेजी से अफीम की खेती की जा रही है ठीक उसी तरीके से सीबीएसई कोर्स के नाम पर संचालित स्कूले सीजी कोर्स की परीक्षा बच्चों से ली जा रही है,संभाग की सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान का ढोंग रचने वाली ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल की दोनों शाखाएं हजारों बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर उनके जीवन को अंधकारमय कर बच्चों के परिजनों को चिंतित एवं विचलित कर दिया.
शहर के मध्य एवं बहार संचालित उक्त दोनों स्कूल की मान्यताओं पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो रहा है,शहर के मध्य मिशन अस्पताल रोड स्थित स्कूल की सीबीएसई की मान्यता 31,3,27 तक वैलिड है जबकि सीपत रोड बैहेतारई स्थित स्कूल की मान्यता 3,13 ,24 कोई खत्म हो गई है, उक्त दोनों स्कूल का संचालन एक ही व्यक्ति एवं संस्थान द्वारा किया जाता है, सोची समझी रणनीति के तहत उच्च स्तर पर सेटिंग कर मान्यता प्राप्त प्रमाण पत्र पर हेरा फेरी कर हजारों बच्चों एवं उनके अभिभावकों को परेशानी में डाल दिया, उन्हें मालूम है कि मजबूरन पालक अपने बच्चों को थक हार के सीजी परीक्षा में बैठा लेंगे ही अभिभावकों को भी शांत करने हेतु बाकायदा दी गई नोटिस पर स्पष्ट लिखा गया है कि बच्चों को सिर्फ परीक्षा में बैठना है बाकी पास करने की जिम्मेदारी हमारी ?
सीबीएसई कोर्स करने वाला बच्चे के अभिभावक अपना पेट कट कट कर महंगी किताब महंगी फीस स्कूल के विभिन्न नियम कानून जूते टाई से लेकर किताब कॉपी तक निर्धारित स्थान पर खरीदारी करने के बावजूद मजबूर है सीजी बोर्ड की परीक्षा दिलाने अपने बच्चों को तो उसे प्रमाण पत्र भी तो वही का मिलेगा,अभिभावक बच्चों को स्कूल की गलती का खामियाजा जबरिया भोगना पड़ रहा है .


