डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी का नेटवर्क, इंदौर से दो और आरोपी गिरफ्तार
सीबीआई और टेलीकॉम अधिकारी बनकर 24 घंटे से अधिक समय तक बुजुर्ग को रखा डर के साये में, पुलिस से सेटिंग के नाम पर ऐंठे थे 32 लाख
जांजगीर-चांपा. मनीलॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने और सीबीआई की कार्रवाई का डर दिखाकर बुजुर्ग से 32 लाख रुपए की साइबर ठगी करने के मामले में जांजगीर पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। साइबर थाना पुलिस ने मामले में इंदौर से दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले इस प्रकरण में पंजाब से एक आरोपी की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में इस्तेमाल मोबाइल फोन, बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज, आधार कार्ड और अन्य सामग्री जब्त की है। पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जांजगीर निवासी तुषारकर देवांगन ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके मोबाइल पर एक व्यक्ति ने खुद को टेलीकॉम अथॉरिटी का अधिकारी विजय खन्ना बताते हुए फोन किया। उसने उनका मोबाइल नंबर मनीलॉन्ड्रिंग के मामले में इस्तेमाल होने और मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज होने की जानकारी दी। इसके बाद सीबीआई अधिकारी बनकर दूसरे व्यक्ति ने फोन किया और मनीलॉन्ड्रिंग के मामले में डिजिटल अरेस्ट किए जाने की बात कही। आरोपियों ने बुजुर्ग को 24 घंटे से अधिक समय तक अलग-अलग मोबाइल नंबरों से फोन कर पुलिस, सीबीआई और टेलीकॉम अथॉरिटी का अधिकारी बनकर डराया। गिरफ्तारी से बचाने और पुलिस से सेटिंग कराने के नाम पर उनसे 32 लाख रुपए जमा करा लिए। कुछ दिनों बाद सभी मोबाइल नंबर बंद हो गए, तब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने परिजनों को इसकी जानकारी दी। शिकायत पर अपराध क्रमांक 649/2025 के तहत बीएनएस की धारा 318(4), 3(5) तथा आईटी एक्ट की धारा 66डी के तहत मामला दर्ज किया गया। कार्रवाई में निरीक्षक भास्कर शर्मा, पीएसआई रुकसाना बानो, प्रधान आरक्षक मनोज तिग्गा, हेड कांस्टेबल विवेक सिंह और गिरीश कश्यप का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
बैंक खातों के जरिए आरोपियों तक पहुंची पुलिस
विवेचना के दौरान पुलिस ने ठगी की रकम जिन बैंक खातों में ट्रांसफर हुई थी, उनकी जानकारी जुटाई। जांच में स्लाइस स्मॉल फाइनेंस बैंक के खाते में रकम जाने का पता चला। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम इंदौर भेजी गई, जहां से सौम्य जैसवार (21), निवासी प्रजापत नगर, इंदौर और देवराज अमकरे (24), निवासी गुरु शंकर नगर, इंदौर को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में दोनों ने अपराध स्वीकार किया और अपने खातों में ठगी की रकम प्राप्त करना बताया। आरोपियों की निशानदेही पर बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नंबर, आधार कार्ड, पैन कार्ड और मोबाइल हैंडसेट जब्त किए गए। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर दोनों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया।
डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं
जांजगीर पुलिस ने लोगों को आगाह किया है कि कानून में डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई व्यवस्था नहीं है और न ही पुलिस किसी व्यक्ति को फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट करती है। मनीलॉन्ड्रिंग, ड्रग्स सप्लाई या अन्य गंभीर अपराधों में फंसाने का डर दिखाकर यदि कोई व्यक्ति खुद को सीबीआई, पुलिस, टेलीकॉम अथॉरिटी, एयरपोर्ट या नेवी का अधिकारी बताकर पैसे मांगता है तो उसके झांसे में न आएं। गिरफ्तारी की धमकी देकर पैसे वसूलना साइबर ठगी का तरीका है। ऐसे मामलों में तत्काल पुलिस को सूचना दें।


