लखीराम सभागार ऑडिटोरियम में सजेगी सुरों के साथ स्मृतियों की महफिल
कुछ गीत केवल सुने नहीं जाते, वे जिए जाते हैं : श्रुति प्रभला
बिलासपुर. शनिवार 24 अक्टूबर को शाम 6.30 बजे बिलासपुर के लखीराम सभागार ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम श्रोताओं को हिंदी फिल्म संगीत के उस सुनहरे दौर की सैर कराएगा। जिसके गीत आज भी पीढिय़ों को जोड़ते हैं। कार्यक्रम में प्रवेश नि:शुल्क रहेगा।
बिलासपुर की सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका श्रुति प्रभला एक विशेष सांगीतिक संध्या नॉस्टेल्जिया लेकर आ रही हैं। नॉस्टेल्जिया केवल पुराने फिल्मी गीतों की प्रस्तुति नहीं, बल्कि उन भावनाओं को फिर से महसूस करने का अवसर है, जो इन गीतों के साथ हमारी जिंदगी का हिस्सा बनीं। मोहब्बत की नजाकत, जुदाई की कसक, रिश्तों की गर्माहट और बीते हुए लम्हों की मिठास हिंदी सिनेमा के कालजयी गीतों में जीवन के कितने ही रंग समाए हुए हैं। शास्त्रीय संगीत की गंभीर साधना और भावपूर्ण गायकी के लिए पहचानी जाने वाली श्रुति प्रभला भजन और गजल गायन में भी अपनी विशिष्ट पहचान रखती हैं। उनकी गायकी की विशेषता सुरों की शुद्धता, भावों की गहराई और रचना के मर्म तक पहुंचने की संवेदनशीलता है।
नॉस्टेल्जिया में वे इसी सांगीतिक समझ के साथ हिंदी फिल्म संगीत के सदाबहार नगमों को प्रस्तुत करेंगी।


