शरद पूर्णिमा पर चंदेला नगर में सजा काव्य-दरबार
बिलासपुर. शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर चंदेल नगर कॉलोनी में कॉलोनीवासियों द्वारा भावपूर्ण कवि-सम्मेलन का आयोजन किया गया। वरिष्ठ कवि विजय कल्याणी तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन का संचालन साहित्यकार एवं कवि ओम प्रकाश भट्ट ने किया।
वरिष्ठ कवि बुधराम यादव ने सभी कवियों का परिचय देते हुए उनका स्वागत किया।कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चरणों में पुष्प अर्पित कर तथा दीप प्रज्ज्वलित करके किया गया। कवि-सम्मेलन में हास्य, व्यंग्य,श्रृंगार, आध्यात्मिकता और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कविताओं एवं ग़ज़लों की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। कवियों की प्रभावशाली अभिव्यक्ति पर श्रोताओं ने तालियों के साथ उत्साहपूर्वक अपनी प्रतिक्रिया दी। चंदेला नगर कॉलोनी में आयोजित यह काव्य-संध्या यादगार बन गई।
चाँद के प्रतीक से समाजसेवियों को दिया संदेश
वरिष्ठ कवि विजय तिवारी ने पूनम के चाँद को प्रतीक बनाकर समाज के कर्णधारों और समाज सेवियों से आह्वान किया कि सच्चा समाजसेवक वही है, जो समाज में अमृत बाँटे और लोगों के हृदय की पीड़ा दूर करने का प्रयास करे। उन्होंने कहा—
ओ पूनम के चाँद,
अमिय की बूँदें लाना।
हृदय बहुत है पीर,
वहाँ पर हाथ लगाना।।
व्यंग्यकार ओमप्रकाश भट्ट ने चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने और बाद में जनता से दूर हो जाने वाले लापरवाह नेताओं पर व्यंग्य करते हुए कहा—
आम चुनाव पड़े हो,
हवा के महल बनाते हैं,
और फिर जाने कहाँ,
हवा हो जाते हैं।
ईश्वर-स्मरण और नशामुक्ति का संदेश वरिष्ठ अमृतलाल पाठक ने अपनी रचना के माध्यम से आध्यात्मिक भावों की अभिव्यक्ति करते हुए कहा कि मानव जीवन में ईश्वर का ध्यान करना सर्वोपरि है। उन्होंने अपनी पंक्तियों में समर्पण और ईश्वर- स्मरण का भाव व्यक्त किया—
कुछ नहीं है पास मेरे,
क्या समर्पित मैं करूँ?
ईश! मत मुझको भुलाना,
ध्यान तेरा ही धरूँ।
कवयित्री श्रीमती मनीषा भट्ट ने विशेष रूप से नई पीढ़ी को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने का आह्वान किया। उन्होंने शरद पूर्णिमा के चाँद और अमृत कलश के प्रतीक के माध्यम से जीवन को नशे के विष से सुरक्षित रखने का संदेश दिया—
चाँद अमृत कलश ले खड़ा द्वार पर,
ज़िंदगी को ज़हर से बचा लीजिए।
–श्रृंगार और ग़ज़ल की प्रस्तुतियों ने मोहा मन–
श्रृंगार रस के कवि हूप सिंह क्षत्री ने अपनी रचना में
नायिका के सौंदर्य का मनोहारी चित्रण करते हुए श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी पंक्तियाँ थीं—
तेरी आँखों में अलकनंदा है,
तेरे मुखड़े पे कोई चंदा है।
उर्दू के ग़ज़लकार अनमोल सिन्हा ने अपनी मधुर आवाज़ और तरन्नुम से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। उनकी ग़ज़ल के ये अशआर खूब सराहे गए—
लफ़्ज़ कुछ हमने उठाए और ग़ज़ल कह दी,
हाल हम अपना सुनाए और ग़ज़ल कह दी।
जीवन को प्रेम और उत्सव से भरने का आह्वान
वरिष्ठ कवि बुधराम यादव ने जीवन को प्रेम से भरकर उत्सव बनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा—
जीवन को गीत में करें,
पोर-पोर प्रीतमय करें।
छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ कवि सनत तिवारी ने छत्तीसगढ़ी भाषा में शरद ऋतु की सुंदरता का मनमोहक चित्र प्रस्तुत किया। उनकी पंक्तियों ने श्रोताओं को स्थानीय भाषा और लोक-संस्कृति की मिठास से जोड़ दिया—
खंजन जोड़ी फुदुक-फुदुक के नाचत हे,
शरद ऋतु के रात अबड़ निक लागत हे।
युवा सजलकार मयंक मणि दुबे ने अपनी रचना के माध्यम से जीवन में पीड़ा के महत्त्व को रेखांकित करते हुए कहा—
पीड़ा जीवन का उत्सव है,
जीवन है उत्सव पीड़ा का।
काव्य-सम्मेलन में विभिन्न रसों और विषयों की रचनाओं ने श्रोताओं को देर रात तक बाँधे रखा। अंत में आभार प्रदर्शन एवं खीर-प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
प्रेषक : ओमप्रकाश भट्ट


