छत्तीसगढ़ के अस्पतालों में इलाज का संकटः 9,392 पद रिक्त, 80 प्रतिशत विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी, भाजपा सरकार में मरीज बेहाल – कांग्रेस

रायपुर. छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था बर्बाद हो चुकी है। प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी के कारण आम जनता को समय पर इलाज नहीं मिल रहा है। गरीब मरीज एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकने को मजबूर हैं। भाजपा सरकार के विकास के दावों के बीच प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की यह तस्वीर बेहद चिंताजनक है।

प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों पर आधारित जुलाई 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, प्रदेश में कुल 9,392 पद रिक्त बताए गए हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों के 2,025 पदों के मुकाबले केवल 408 विशेषज्ञ कार्यरत हैं। यानी लगभग 80 प्रतिशत विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। इसी तरह स्टाफ नर्सों के 2,745 पद रिक्त बताए गए हैं। ये आंकड़े स्वास्थ्य विभाग की बदहाल स्थिति को बताते है।

प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले मरीजों को यदि डॉक्टर ही उपलब्ध नहीं होंगे, तो स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ कैसे मिलेगा? विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को दूसरे शहरों में रेफर होना पड़ता है। इससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है और गंभीर मरीजों के उपचार में देरी का खतरा पैदा होता है। निजी अस्पतालों का महंगा इलाज हर परिवार की पहुंच में नहीं है। ऐसे में सरकारी अस्पतालों की बदहाली गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन रही है।

प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि कांग्रेस मांग करती है कि प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में रिक्त पदों की जिलेवार और पदवार सूची सार्वजनिक की जाए, विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं स्टाफ नर्सों की भर्ती के लिए ठोस समयबद्ध कार्यक्रम घोषित किया जाए और दूरस्थ क्षेत्रों में डॉक्टरों की तैनाती को प्राथमिकता दी जाए। जनता को विज्ञापन नहीं, अस्पतालों में डॉक्टर चाहिए; घोषणाएं नहीं, समय पर उपचार चाहिए। सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *