साहित्य वृंदों की कंठस्थ रचना पाठ से श्रोता हुए मुग्ध
बिलासपुर. साहित्य वृंद बिलासपुर की काव्य गोष्ठी सांई आनंदम परिसर उसलापुर में संध्या साढ़े चार बजे आयोजित हुई। इस गोष्ठी को सभी ने नई पहल और विशिष्ट गोष्ठी का दर्जा दिया क्योंकि साहित्यकारों को कंठस्थ कर अपनी रचना पढ़ने का आहृवान किया गया था।
इसमें चौबीस रचनाकारों ने बिना देखे कंठस्थ रचना का पाठ किया।इस गोष्ठी की भूमिका ओमप्रकाश भट्ट जी और विजय कल्याणी तिवारी ने संयुक्त रूप से रखी।इस गोष्ठी का संचालन हरबंस शुक्ल, अध्यक्षता श्रमेश चंद्र श्रीवास्तव ने किया।
इस मौके पर श्री श्रीवास्तव ने कहा कि यह अपने आप में महत्वपूर्ण पहल है।इससे प्रस्तुति करण और श्रोता के बीच संबंध सघन होंगे। उनका कहना है कि गीत कविता का प्राण है।यहां उच्चकोटि के गीतों की उत्कृष्ट प्रस्तुति ने बहुत प्रभावित किया।
कार्यक्रम में अमृत पाठक,बुधराम यादव, विजय कल्याणी तिवारी, मयंक दुबे, गजानंद पात्रे ,हूप सिंह क्षत्री, रेखराम,पदुमदास, राकेश पाण्डेय,ओमप्रकाश भट्ट,शिव शरण श्रीवास्तव,मनीषा भट्ट, पूर्णिमा तिवारी,आशा चंद्राकर, रश्मि अग्रवाल ,मनीष शंकर , राजेश कश्यप,राजेन्द्र मौर्य,दिनेश्वर जाधव,शैलेन्द्र गुप्ता आदि ने अपनी कंठस्थ कविता का पाठ किया। आभार प्रदर्शन मयंक दुबे ने किया।


