December 6, 2023

VIDEO गुटखा का अधिक उपयोग कैंसर की मुख्य वजह : डॉ. विनय खरसन

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बिलासपुर. मुॅह का नहीं खुलना, एैसी समस्या जिसके कारण तो अनेक है पर ईलाज एक ही है, जबड़ो के जोड़ों का आपरेशन। इसके प्रमुख कारणों में दुर्घटना से जबड़ों का क्षतिग्रस्त होना, अक्लदाढ़ केा इन्फेक्टेड होना, तम्बाखू कैंसर आदि है पर प्रमुख कारण गुटखा, उसके उपयोग के तरीके है। उक्त बातें डाॅ विनय खरसन वरिष्ठ चिकित्सक दांत फेषियल सर्जरी, डाॅ प्रबुद्ध सेन व सीओओ सजल सेन ने आज पत्रवार्ता में कही। डाॅ सजल सेन ने कहा कि पान सुपारी का उपयोग तो पुराने समय से चला आ रहा है पर उस समय मॅुह नहीं खुलने की समस्या नही पायी जाती थी आज ऐसा क्या हो गया जिससे ट््िरसमस यानि मुंह नहीं खुलने की समस्या इतनी बढ़ गयी है इसके कारणों में उन्होंने गुटखा का अत्यधिक उपयोग एवं उसके उपयोग के तरीके व उसके निर्माण में होने वाले रासायनिक तत्वों की बात कही। ऐसे ही समस्या से ग्रसित लोगों के लिये अपोालो हाॅस्पिटल बिलासपुर में विषेष ट््िरसमस क्लिलिक में आये मन्नू राम कोषले, पथरिया ने वरिष्ठ चिकित्सक डाॅ विनय खरसन से संपर्क किया जिसमें डाॅ विनय खरसन ने सभी आवष्यक जाॅच के उपरांत इस जटिल सर्जरी को करने का निर्णय लिया।

मंुह के बंद होने के विभिन्न कारणों पर जानकारी देते डाॅ विनय खरसन वरिष्ठ चिकित्सक दंत एवं फेषियल सर्जरी ने इसे आगे विस्तार से बताते हुये कहा कि मुंह के अंदर की त्वचा या परत अत्यधिक संवेदनषील होती है और मनुष्य के जागते हुये विभिन्न क्रियाकलापों जैसे बात करना खाद्य पदार्थ चबाना आदि से इसकी सफाई की प्रकिया निरंतर जारी रहती है, परन्तु सोते समय यह प्रकिया रूक जाती है। ऐसे सोते समय गुटखा या पान को दबा कर सोने से सबम्यूकस यानि मुंह की त्वचा में दबाये हुये गुटखे के हानिकारक तत्वों के कारण घाव हो जाता है और धीरे धीरे यह ट््िरसमस यानि मुह का नही खुलने में परिवर्तित हो जाता है यदि इसे तब भी नहीं रोका गया तो यह कैंसर में परिवर्तित हो सकता है। डाॅ खरसन व डाॅ प्रबुद्ध सेन ने इस आॅपरेषन की जटिलता की जानकारी देते हुये कहा कि इस आपरेशन के फेशयल नर्व करने का खतरा होता है जिससे चहरे में स्थायी लकवा हो सकता है अतः अत्यंत सावधानी के साथ इस आॅपरेषन को अंजाम दिया जाता है। यह आपरेशन दोनो ओर के जबडों में एक साथ किया जाता था इसलिये यह और भी जटिल हो जाता है। उन्होने बताया कि सामान्यतः मंुह का कम से कम 30 एमएम तक मुंह का खुलना चाहिए यदि ऐसा नही है तो तुरंत ही किया विषेषज्ञ की सलाह लेना चाहिये। डाॅ प्रबुद्ध सेन ने बताया कि सोने के पहले मुंह साफ अर्थात् ब्रष करना चाहिये इससे मुंह संबंधित समस्याओं से निजात पायी जा सकती है। पत्रकारों को बताते हुये मरीज मन्नू राम कोषले ने बताया कि पहले उसका मुंह नहीं ख्ुालने के कारण उसे स्ट््रा से खाना खाने होता था इसके लिये कई अस्पतालों के चक्कर लगाने के बाद भी उसे आराम नहीं मिला परन्तु अपोालों में डाॅ विनय खरसन से संपंर्क करने के बाद उनके ईलाज से आराम मिला और आज वो सामान्य तौर पर बात कर सकता है और बिना स्ट््रा के मुंह से चबा कर सामान्य व्यक्ति की तरह खाना खा सकता है। डाॅ सजल सेन ने बताया कि मुंह नहीं खुलने की समस्या के लिये अपोलो अस्पताल ने सप्ताह के एक दिन ट््िरसमस क्लीनिक आरंभ किया है जिससे लोगों को सही ईलाज मिले और मरीज सामान्य हो सके।

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