जीवन पद्धति का मार्ग प्रशस्त करती है भागवत कथा:डॉ. विनय पाठक

 

” श्रीमद्भागवत् कथा : समग्र अनुशीलन ” का विमोचन

बिलासपुर. श्रीमद्भागवत् भारतीय ज्ञान परंपरा का एक ऐसा अद्भुत ग्रंथ है जो आध्यात्मिक शक्ति को जागृत करके, प्रेम-भक्ति के उदात्त स्वरूप को उपस्थित करके और दिव्यानुभूति को ऊर्जस्वित करके आदर्श जीवन पद्धति का मार्ग प्रशस्त करता है।
समाजिक जीवन में सहिष्णुता,समन्वय,सद्भाव तथा धर्म को धारित एवं नैतिकता को आचारित कर प्राचीन प्रादर्शों को पुनर्स्थापित करने का उद्घोष श्रीमद्भागवत करती है।विदुषी डॉ० आभा गुप्ता ने ‘श्रीमद्भागवत् कथा- समग्र अनुशीलन’ में जहाँ आध्यात्मिक,नैतिक व जीवन मूल्यों का सरल भाषा में विवेचन किया है,वहीं राष्ट्रनिर्माण की विराट संकल्पना को भी भक्ति, ज्ञान,धर्म आदि के माध्यम से निरूपित करने का स्तुत्य प्रयास किया है।
यह विचार देश के जाने- माने विमर्शकार,छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के पूर्व अध्यक्ष, थावे विद्यापीठ गोपालगंज बिहार के कुलपति डॉ.विनय कुमार पाठक ने व्यक्त किए।
प्रयास प्रकाशन साहित्य अकादमी के तत्वावधान में आयोजित “नगर की विदुषी डॉ. आभा गुप्ता द्वारा रचित शोध ग्रंथ ‘श्रीमद्भागवत् कथा : समग्र अनुशीलन’ के भव्य विमोचन एवं सम्मान समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में डॉ.पाठक सभा को संबोधित कर रहे थे।
समारोह की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति डॉ.चंद्रभूषण वाजपेयी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा-श्रीमद्भागवत् कथा ज्ञान- विज्ञान का अनंत सागर है। हम इस महान ग्रंथ के अध्ययन, मनन,चिंतन से जहां अपने जीवन को नैतिक जीवन मूल्यों से समृद्ध करते हैं वहीं संपूर्ण ब्रह्मांड के उत्थान के लिए विचार करने की प्रेरणा भी प्राप्त करते हैं।
समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित देश के सुप्रसिद्ध धर्म चिंतक धर्मभूषण डॉ.श्रीधर गौरहा ने कहा कि हमें अपने आध्यात्मिक और धार्मिक ग्रंथों को केवल कर्मकांड या पूजापाठ तक ही सीमित नहीं रखना चाहिए। ये ग्रंथ सामाजिक जीवन के आधारभूत स्तंभ हैं। इनका पठन-पठान विभिन्न विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में अनिवार्य रूप से समाहित हो।
झांसी से पधारे समीक्षक और कथाकार डॉ.रामशंकर भारती ने इस अवसर पर श्रीमद्भागवत कथा समग्र अनुशीलन की लेखिका डॉ. आभा गुप्ता के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आज हमारे देश में पुस्तक संस्कृति प्रायः नष्ट होती जा रही है, खासतौर से धार्मिक ग्रंथों के पठन-पाठन और उनके पुनर्प्रकाशन की ओर उपेक्षा का भाव भी दिखाई देता है। ऐसी विकट परिस्थिति में पुस्तक संस्कृति का संवर्धन हमारी भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध करता है।
श्रीमद् भागवत कथा समग्र अनुशीलन की लेखिका डॉ.आभा गुप्ता ने अपने वक्तव्य में कहा-यह अद्भुत ग्रंथ ने मेरे व्यक्तिगत जीवन को जहां आध्यात्मिकता से समृद्ध किया है वहीं हमारा सार्वजनिक जीवन भी आलोकित हुआ है।मैं अपने गुरुजनों, स्वजनों और श्रद्धेय गुरुवर डॉ. विनय कुमार पाठक के, प्रति आभारी हूँ जिनके मार्गदर्शन में यह ग्रंथ आकर ले सका।
कार्यक्रम शुभारंभ सरस्वती वंदना की प्रस्तुति देकर भारत की नन्हीं कोकिला मयंषी खंडेलवाल ने किया। वहीं छत्तीसगढ़ रत्न से सम्मानित बाल कलाकार तनिष्क वर्मा ने श्रीकृष्ण भजनों की सुरमई प्रस्तुति से समारोह को संगीतमय बना दिय
इस अवसर पर विदुषी कृतिकार डाॅ.आभा गुप्ता का अभिनंदन किया गया। डॉ. भगवती प्रसाद अग्रवाल, श्रीमती मृदुला अग्रवाल, शुभ्रा अग्रवाल ने अतिथियों को अंगवस्त्र,श्रीफल एवं मोमेंटो भेंट कर सम्मानित किया ।
स्वागत भाषण में डाॅ.राघवेन्द्र कुमार दुबे ने प्रयास प्रकाशन साहित्य अकादमी राष्ट्रीय समिति बिलासपुर द्वारा आयोजित किए गए साहित्यिक आयोजनों की जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान समय में साहित्य सृजन के क्षेत्र में बिलासपुर के वरिष्ठ, युवा साहित्यकारों सहित महिला साहित्यकार भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं, जिससे साहित्य भंडार समृद्ध हो रहा है ।
कार्यक्रम का सफल संचालन डाॅ.सौम्या गुप्ता ने एवं आभार प्रदर्शन शिवानी तथा धर्मवीर गुप्ता ने संयुक्त रूप से किया ।
इस अवसर पर डाॅ.रमेश चन्द्र श्रीवास्तव, डॉ. सत्य नारायण तिवारी,डाॅ. विनोद कुमार वर्मा, डाॅ.प्रकाश पाठक, डॉ.बसंती वर्मा,डॉ.प्रीति प्रसाद, विष्णु कुमार तिवारी, डाॅ.विवेक तिवारी, सुरेश सिंह बैस, डाॅ.अंकुर शुक्ला, पंकज खंडेलवाल, बालगोविन्द अग्रवाल, मदन मोहन अग्रवाल, शीतल प्रसाद पाटनवार, राम निहोरा राजपूत, डाॅ.शत्रुघन जेसवानी,राजेश कुमार सोनार, श्रीमती सरस्वती सोनी,सनत तिवारी, दिनेश्वर राव जाधव, सहित प्रयास प्रकाशन साहित्य अकादमी के पदाधिकारी एवं सदस्यगण, अनेक साहित्यकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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