भाजपा सरकार ने पौने तीन साल में 1.90 लाख करोड़ कर्जा लिया – कांग्रेस

 

रायपुर.  भारतीय जनता पार्टी की सरकार से राज्य की अर्थव्यवस्था नहीं संभल रही है। प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन के कारण प्रदेश पर पिछले ढाई सालो में लगभग 1.90 लाख करोड़ का कर्जा चढ़ गया है। जबकि इन ढाई सालों में सरकार ने कोई बड़ा नया निर्माण कार्य नहीं शुरू किया, कोई ठोस योजना नहीं बनाया, कोई नई सिंचाई परियोजना, शैक्षणिक औद्योगिक परियोजना नही बनाई। प्रदेश में कोई भी नई सड़के नहीं बनी उसके बाद सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन और गैर उत्पादक खर्चाे के कारण राज्य के ऊपर 1.90 लाख करोड़ का कर्जा भाजपा सरकार ने लाद दिया है।

प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि 2024 के शुरूआत में सरकार ने 25000 करोड़ का कर्ज लिया। फिर 2024-2025 में 33463 करोड़ का कर्जा लिया। 2025-2026 में 36737 करोड़ का कर्जा लिया। 2026-2027 में अभी तक 40000 करोड़ का कर्जा सरकार ने लिया है। धान खरीदी एवं अन्य योजना आधारित ऋण अलग है। सरकार ने ढाई सालों में 1.90 लाख करोड़ कर्ज लेकर राज्य के हर नागरिक पर कर्जा का बोझ लाद दिया है। सरकार लिये हुये कर्ज के ब्याज अदायगी के रूप में प्रतिवर्ष लगभग 9000 करोड़ रू. खर्च कर रही है।

प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि भाजपा सरकार पेट्रोलियम पदार्थाे पर वैट वसूल रही है। बिजली के दामो में 33 प्रतिशत बढ़ोत्तरी कर दिया। बिजली की छूट को बंद कर दिया। जमीनों की रजिस्ट्री में 30 प्रतिशत छूट को समाप्त कर दिया, भूमि गाईड लाईन की दरो को बेतहाशा बढ़ा दिया, शराब की बिक्री बढ़ा दिया। पूर्ववर्ती सरकार के द्वारा चलाई जा रही 20 जनकल्याणकारी योजना को बंद कर दिया। उसके बाद भी राज्य का कर्ज भार बढ़ना बताता है कि सरकार अनुभवहीन और आयोग्य लोगो के हाथों में है।

प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि भारत सरकार के नीति आयोग की “वित्तीय स्वास्थ्य सूचकांक रिपोर्ट” के अनुसार छत्तीसगढ़ की वित्तीय व्यवस्था बदहाल हो चुकी है। नीति आयोग ने देश के 18 राज्यों के वित्तीय स्थिती के बारे में जो रिपोर्ट जारी किया है। उसमें छत्तीसगढ़ 17वें नंबर पर है। राज्य का राजकोषिय घाटा तय लक्ष्य 2.99 से बढ़कर 5.32 हो गया है। नीति आयोग के अनुसार छत्तीसगढ़ की वित्तीय स्थिती दिवालियो होने की है। यह रिपोर्ट प्रदेश के विकास के लिये चिंताजनक है।

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