गंभीर एवं दुर्लभ जन्मजात बीमारी से जूझ रहे नवजात को श्री शिशु भवन हॉस्पिटल ने दिया नवजीवन
एक सप्ताह वेंटिलेटर सपोर्ट, जटिल सर्जरी और करीब 30 दिनों की सतत चिकित्सा के बाद स्वस्थ होकर घर लौटा नवजात
बिलासपुर. श्री शिशु भवन हॉस्पिटल, बिलासपुर की विशेषज्ञ चिकित्सकीय टीम ने गंभीर एवं दुर्लभ जन्मजात बीमारी बिलेट्रल कोएनल एट्रेसिया (Bilateral Choanal Atresia) से जूझ रहे एक नवजात का सफल उपचार कर उसे नया जीवन प्रदान किया है। करीब एक सप्ताह तक वेंटिलेटर सपोर्ट, आवश्यक जटिल सर्जिकल उपचार और लगभग 30 दिनों की सतत चिकित्सा एवं विशेष नर्सिंग देखभाल के बाद नवजात स्वस्थ अवस्था में अपने माता-पिता के साथ घर लौट गया।
बेबी ऑफ गौसिया परवीन, निवासी लोरमी, वार्ड क्रमांक-2, डोंगरी पारा, जिला मुंगेली का जन्म 03 जुलाई 2026 को हुआ था। जन्म के तत्काल बाद नवजात को सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगी। दोनों नासिका मार्ग जन्म से बंद होने के कारण उसकी स्थिति अत्यंत गंभीर थी।
नवजात को उसी दिन उपचार के लिए श्री शिशु भवन हॉस्पिटल, बिलासपुर लाया गया, जहां डॉ. श्रीकांत गिरी के नेतृत्व में चिकित्सकीय टीम ने तत्काल उपचार प्रारंभ किया। बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए सबसे पहले उसकी श्वसन एवं ऑक्सीजन की स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया।
क्या है Bilateral Choanal Atresia?
बीमारी के संबंध में डॉ. श्रीकांत गिरी ने बताया कि Bilateral Choanal Atresia नवजात शिशुओं में पाई जाने वाली एक दुर्लभ जन्मजात स्थिति है, जिसमें नाक के दोनों पिछले वायुमार्ग जन्म से ही बंद रहते हैं।
नवजात प्रारंभिक अवस्था में मुख्य रूप से नाक के माध्यम से सांस लेते हैं। ऐसी स्थिति में दोनों नासिका मार्ग बंद होने पर बच्चे को गंभीर श्वसन संकट और ऑक्सीजन की कमी हो सकती है तथा शरीर नीला पड़ने जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। समय पर चिकित्सकीय सहायता नहीं मिलने पर यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।
डॉ. गिरी के अनुसार ऐसे मामलों में सबसे पहली प्राथमिकता नवजात की सांस एवं ऑक्सीजन की स्थिति को स्थिर करना होती है। आवश्यकता के अनुसार वेंटिलेटर सपोर्ट दिया जाता है। बच्चे की स्थिति स्थिर होने के बाद बंद नासिका मार्ग को खोलने के लिए आवश्यक सर्जिकल उपचार किया जाता है।
इस प्रकार के जटिल उपचार में नियोनेटल, सर्जिकल, एनेस्थीसिया, नर्सिंग एवं सपोर्ट टीम के बीच बेहतर समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
एक सप्ताह वेंटिलेटर पर रहा नवजात
नवजात की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे करीब एक सप्ताह तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। चिकित्सकीय टीम द्वारा लगातार उसकी स्थिति की निगरानी की गई।
बच्चे की स्थिति आवश्यक रूप से स्थिर होने के बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों ने पूरी तैयारी के साथ जटिल सर्जिकल उपचार किया। इसके बाद भी नवजात को लगातार चिकित्सकीय निगरानी और विशेष नर्सिंग देखभाल में रखा गया।
करीब 30 दिनों की सतत चिकित्सा, निगरानी और विशेष देखभाल के बाद नवजात ने स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया। 08 अगस्त 2026 को उसे स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दी गई।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की पूरी टीम ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
इस चुनौतीपूर्ण उपचार में डॉ. श्रीकांत गिरी, डॉ. रवि द्विवेदी, डॉ. अंकित ठकराल, डॉ. प्रणव अंधारे, डॉ. विशाल मांझी एवं डॉ. मोनिका जायसवाल सहित पूरी चिकित्सकीय टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
अस्पताल प्रबंधक श्री नवल वर्मा के मार्गदर्शन में नर्सिंग एवं सपोर्ट स्टाफ ने भी नवजात की देखभाल में संवेदनशीलता और समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाई।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार इस सफलता में किसी एक व्यक्ति के बजाय पूरी टीम का समन्वित प्रयास महत्वपूर्ण रहा। गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचे नवजात को स्थिर करने से लेकर सर्जिकल उपचार और उसके बाद की देखभाल तक प्रत्येक चरण में लगातार निगरानी की गई।
स्वस्थ बच्चे को गोद में लेकर भावुक हुए माता-पिता
लगभग एक महीने तक उपचार के बाद जब नवजात को स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी मिली तो परिवार के लिए यह अत्यंत भावुक क्षण रहा। बच्चे के माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू थे। उन्होंने उपचार करने वाले चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और अस्पताल की पूरी टीम के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।
नवजात का स्वस्थ होकर घर लौटना चिकित्सा विशेषज्ञता, समय पर उपचार, टीमवर्क, सतत निगरानी और मानवीय संवेदनाओं के समन्वय का प्रेरणादायक उदाहरण है।
एक नन्ही जिंदगी को मिला नया जीवन, एक परिवार की उम्मीद हुई साकार।




