नियमितीकरण के अपने वायदों से मुकर गई है सरकार, हर विभाग प्लेसमेंट एजेंसियों के भरोसे- दीपक बैज

आउटसोर्सिंग करके युवाओं के सरकारी नौकरी में नियमित भर्ती के अधिकार को बेच रही है सरकार


रायपुर.
प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से सरकारी पदों पर आउटसोर्सिंग की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि स्वास्थ्य विभाग में 100 करोड़ के मैनपॉवर सप्लाई की प्रक्रिया चल रही है, दैनिक वेतनभोगी और अनियमित कर्मचारियों को 100 दिन में नियमितीकरण करने का वादा करके सरकार में आए भाजपाई अब वादाखिलाफी पर उतर आए हैं। ढाई साल बीत जाने के बावजूद भी छत्तीसगढ़ के दैनिक वेतन भोगी और अनियमित कर्मचारी ठगे जा रहे हैं। मार्च 2026 में माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में सुनवाई के दौरान स्पष्ट तौर पर कहा था कि सरकारी संवैधानिक नियोक्ता है और गरीब कर्मचारियों के दम पर अपना बजट संतुलित नहीं कर सकती। जो लोग बुनियादी और महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवाओं को संभाल रहे हैं उनके हित में सहानुभूति पूर्वक विचार कर निर्णय लेने के कठोर निर्देश जारी किया था, लेकिन भाजपा सरकार की नीयत नहीं है कि अनियमित कर्मचारियों को नियमित किया जाए और इसीलिए आउटसोर्सिंग के जरिए काम लेकर नियमित नियुक्तियों से बचने का कुत्सित प्रयास भाजपा की सरकार हर विभाग में कर रही है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि नियमित करना तो दूर, वायदे के विपरीत भाजपा की सरकार ने कर्मचारियों के हर वर्ग को ठगा है, विद्या मितान, अतिथि शिक्षक, प्लेसमेंट और अनियमित कर्मचारी नौकरी से निकाल दिए गए। पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार ने पुरानी पेंशन योजना पुनः लागू किया नई पेंशन योजना के तहत कर्मचारियों के हक का काटा गया पैसा लगभग 31 हजार करोड़ रूपया केंद्र की एजेंसी एनएसडीएल ने वापस नहीं लौटाया, डीए के एरियर्स के लिए प्रदेश के 5 लाख सरकारी कर्मचारी लगातार आंदोलित है। रसोईया बहनें, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सफाई कर्मचारी, कोटवार संघ, पंचायत सचिव, पटवारी, आउटसोर्सिंग कर्मचारी इस सरकार में शोषण के शिकार हैं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की 95 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग समुदाय की है, नियमित भर्ती नहीं होने से इन वर्गों के योग्य युवाओं को आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है। भाजपा की सरकार छत्तीसगढ़ के अनियमित कर्मचारियों के साथ भी वादाखिलाफी पर उतर आयी है। 47000 स्कूल सफाई कर्मचारी, 13,000 रसोइए, डीएड, बीएड अभ्यर्थी सड़क पर हैं, बिजली विभाग के 12 हजार से अधिक कर्मचारी कई वर्षों से सेवा दे रहे हैं, लेकिन वादा करके भी उन्हें नियमित नहीं कर रही है सरकार। सहकारी सोसायटियों के अनियमित कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है, समान कार्य के बावजूद कर्मचारियों का आर्थिक और मानसिक शोषण किया जा रहा है। एस्मा का डर दिखाकर उनकी आवाज़ दबाई जा रही है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार बहानेबाजी छोड़कर विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए मोदी की गारंटी के वायदे पर तत्काल अमल करें और आउटसोर्सिंग बंद कर नियमितीकरण करे।

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