करैत, कोबरा और वाइपर के दंश से पीडि़त 5 मासूम बच्चों का हुआ सफल इलाज
रायगढ़। श्री लखीराम अग्रवाल स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध संत बाबा गुरु घासीदास जी स्मृति चिकित्सालय रायगढ़ ने विषैले सर्पदंश से जूझ रहे पाँच गंभीर बाल रोगियों का सफल उपचार कर उन्हें नया जीवन दिया है। अत्यंत नाजुक स्थिति में अस्पताल पहुंचे इन बच्चों में से तीन को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखना पड़ा, जबकि गंभीर मामलों में 50 वायल तक एंटी-स्नेक वेनम (एएसवी) का उपयोग किया गया। विशेषज्ञ चिकित्सकीय देखरेख, आधुनिक पीआईसीयू सुविधाओं और सतत उपचार के परिणामस्वरूप सभी बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होकर चिकित्सालय से डिस्चार्ज किए गए।
बाल्य एवं शिशु रोग विभाग तथा पीआईसीयू में भर्ती पांचों बच्चों में चार न्यूरोटॉक्सिक तथा एक हेमोटॉक्सिक सर्पदंश का मामला था। इनमें तीन करैत, एक कोबरा और एक वाइपर के दंश से पीडि़त थे। सभी को गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया था, जहां तत्काल आपातकालीन उपचार शुरू किया गया। सबसे संवेदनशील मामला धरमजयगढ़ के दो सगे भाइयों—7 वर्षीय वीर कुमार और 12 वर्षीय लोकेश राठिया—का था। एक जुलाई की रात सोते समय दोनों को करैत ने गर्दन पर काट लिया। सुबह तक दोनों में गंभीर न्यूरोपैरालिटिक विषाक्तता विकसित हो चुकी थी और उनकी स्थिति अत्यंत चिंताजनक हो गई थी।
इसी प्रकार सक्ती जिले के हासौद निवासी 7 वर्षीय मंजू को कोबरा ने पैर में काट लिया था, जिससे पैर में गंभीर सूजन और फफोले बन गए। वहीं रायगढ़ के 5 वर्षीय हितेश ढंगर को वाइपर के दंश से रक्तस्राव और रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो गई थी। कलमी निवासी 7 वर्षीय हर्षित प्रजापति को भी सोते समय करैत ने काट लिया था, जिससे उसे गंभीर न्यूरोटॉक्सिक विषाक्तता हो गई।


