सर्पदंश मुआवजा घोटाले में बड़ा एक्शन… एसडीएम और तहसील कार्यालय के तीन बाबू गिरफ्तार
फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जाली दस्तावेजों से हड़पे गए लाखों रुपये
बिलासपुर। जिले में फर्जी सर्पदंश से मौत दर्शाकर सरकारी मुआवजा हड़पने के बहुचर्चित घोटाले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एसडीएम और तहसील कार्यालय में पदस्थ तीन बाबुओं को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। जिले में सामने आए 15 फर्जी सर्पदंश प्रकरणों की जांच के दौरान लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की भी गिरफ्तारी हो सकती है। सरकंडा थाना प्रभारी प्रदीप आर्य ने बताया कि क्षेत्र में एक व्यक्ति ने फांसी लगाकर आत्महत्या की थी। इस मामले के मर्ग नंबर का दुरुपयोग करते हुए फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और दस्तावेज तैयार किए गए। आरोप है कि तहसील कार्यालय के बाबू हरिशंकर राठौर, एसडीएम कार्यालय के बाबू नरेंद्र कौशिक और गरीब बिंझवार ने मिलकर सर्पदंश से मौत का फर्जी प्रकरण तैयार किया और कलेक्टोरेट में प्रस्तुत कर सरकार से मिलने वाली चार लाख रुपये की सहायता राशि प्राप्त कर ली।
विधानसभा में उठा मामला
इस घोटाले का खुलासा तब हुआ, जब वर्ष 2024 में बिलासपुर जिले में सर्पदंश से 431 मौतें दर्ज होने का मामला विधानसभा में उठा। बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने आंकड़ों पर सवाल उठाए थे। इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर जांच शुरू हुई, जिसमें शुरुआती जांच में 15 मामले फर्जी पाए गए। इन मामलों में सरकारी मुआवजा भी जारी किया जा चुका था।


