राष्ट्रकवि ने राष्ट्रीय विमर्श की आधारशिला रखी:  डॉ पाठक

 

राष्ट्रकवि ने हिंदी की खड़ी बोली को समृद्ध किया- वाजपेयी

बिलासपुर. प्रयास प्रकाशन साहित्य अकादमी (राष्ट्रीय समिति) एवं गहोई वैश्य समाज बिलासपुर के संयुक्त तत्वावधान में शासकीय जेपी वर्मा कला एवं वाणिज्य स्नाकोत्तर महाविद्यालय के सभागार में राष्ट्र कवि मैथिलीशरण गुप्त गौरव ग्रंथ (संपादक – मनोहर लाल बरसैंया, डॉ नीतू बरसैंया, डॉ. विनोद कुमार गुप्त)का विमोचन एवं विमर्श कार्यक्रम न्यायमूर्ति चन्द्र भूषण वाजपेयी के मुख्य आतिथ्य, डॉ.विनय कुमार पाठक पूर्व अध्यक्ष (राज्य मंत्री दर्जा) छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग एवं कुलपति थावे विद्यापीठ गोपालगंज बिहार की अध्यक्षता एवं मनोहर लाल बरसैंया, डॉ. श्याम लाल निराला प्राचार्य, लक्ष्मी नारायण बिलैया एवं डॉ.आर.के.गंधी के विशेष आतिथ्य में सोत्साह सम्पन्न हुआ ।
प्रमुख अतिथि न्यायमूर्ति डॉ.चन्द्र भूषण वाजपेयी ने अपने सारगर्भित संबोधन में आयोजकों की प्रशंसा करते हुए कहा कि मैथिलीशरण गुप्त का पूरा जीवन और साहित्य राष्ट्र के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने खड़ी बोली हिन्दी को समृद्ध किया तथा महाकाव्य, खण्ड काव्य,मुक्तक व प्रगीत काव्य के द्वारा हिन्दी काव्य की नींव स्थापित की।
अध्यक्षता की आसंदी से उद्बोधित उद्गार के उपक्रम में डॉ. विनय कुमार पाठक ने कहा कि राष्ट्र कवि मैथिलीशरण गुप्त ने राष्ट्रीय विमर्श की जो आधारशिला रखी, उसके विकास और कार्यान्वयन का समय आ गया है। डॉ.पाठक ने गौरव ग्रंथ की समीक्षा करते हुए कहा कि समीक्षकों ने वाद को प्रमुखता देकर और राष्ट्रीय नारा को पार्श्व में रखकर जो भूल की है,उसे अब सुधारने और पुनर्पाठ के द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति में समावेशित करने की आवश्यकता है। विशेष अतिथि संपादक मनोहर लाल बरसैंया ने गौरव ग्रंथ की संकल्पना और संघर्ष का ब्यौरा प्रस्तुत किया वहीं डॉ. श्याम लाल निराला ने गौरव ग्रंथ को राष्ट्र  स्तर का निर्दिष्ट करते हुए संपादक त्रय को बधाई दी। लक्ष्मी नारायण बिलैया एवं डॉ.आर के गंधी ने गहोई वैश्य समाज बिलासपुर द्वारा राष्ट्र कवि की जयंती मनाने व उनकी प्रतिमा स्थापित जैसे महत्वपूर्ण कार्य की योजना का स्मरण किया और प्रस्तुत ग्रंथ को देश के लिए धरोहर बताया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में सरस्वती व राष्ट्र कवि मैथिलीशरण गुप्त के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन के साथ डॉ.किरण राठौर द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना व राष्ट्र कवि के गीत की प्रस्तुति दी गई। अतिथियों के स्वागत के बाद विमोचन एवं विमर्श के अतिरिक्त राष्ट्र कवि के पुस्तकों की प्रदर्शनी व बिक्री भी आकर्षण के केंद्र बनी।यह योजना पीयूष गुप्ता जी श्री बुक डिपो के सौजन्य से संपन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन डॉ.विनोद कुमार गुप्त संपादक एवं आभार प्रदर्शन राजकुमार बरसैंया ने किया। इस अवसर पर जिन लोगों की उपस्थिति महत्वपूर्ण रही, उनमें सर्वश्री डॉ. राघवेंद्र दूबे, डॉ.रमेश चंद्र श्रीवास्तव, डॉ. बजरंगबली शर्मा और विष्णु कुमार तिवारी प्रमुख थे।गहोई वैश्य समाज से डॉ. वी के नगरिया, सचिव अमित सेठ,शिव कुमार मोतले, राजकुमार बरसैंया, संजीव बहरे एवं समाज की उपाध्यक्षा श्रीमती रश्मि बिलैया और मनीष बरसैंया उपस्थित थे।इस अवसर पर बड़ी संख्या में कवि, साहित्यकार और विद्वतजनों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को भव्य और गरिमामय स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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