जब तक शिवनाथ है तब तक कोई अनाथ नहीं: धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री

 

कोरबा । कोयलांचल की धरा इन दिनों भक्ति के उस शिखर पर है, जहाँ आस्था और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। ढपढप मैदान में आयोजित दिव्य श्री हनुमंत कथा के दौरान बागेश्वर धाम सरकार आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सेवा की एक नई परिभाषा गढ़ी। अपना घर सेवाश्रम के नवीन भवन निर्माण हेतु आयोजित इस कथा में महाराज श्री ने स्पष्ट कहा कि— मेरा मानना है कि जब तक शिव नाथ है, तब तक दुनिया में कोई अनाथ नहीं है। कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने अपना घर सेवाश्रम के प्रमुख राणा मुखर्जी और उनकी पत्नी हनी के सेवा भाव की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि जोड़ी हो तो ऐसी हो। समाज के उन प्रभुजनों की सेवा करना, जिन्हें अपनी सुध-बुध तक नहीं है और जो अपनों द्वारा त्याग दिए गए हैं, वह किसी तीर्थ से कम नहीं है। उन्होंने सेवाश्रम को अद्वितीय सेवा का केंद्र बताते हुए इस नेक कार्य में जुटी पूरी टीम को शुभाशीष दिया।

रविवार को कथा स्थल का दृश्य देखते ही बनता था। हजारों की संख्या में श्रद्धालु पीले वस्त्र (पीतांबरी) धारण कर पहुंचे थे, जिससे पूरा पंडाल स्वर्णिम भक्ति में सराबोर नजर आया। संगीतमय सुंदरकांड पाठ के दौरान जब ढोल-मंजीरों की थाप पर चौपाइयां गूंजी, तो लाखों श्रद्धालुओं का जनसागर जय श्री राम के जयघोष के साथ झूम उठा। महिलाओं की भारी उपस्थिति ने इस आयोजन की भव्यता में चार चांद लगा दिए। सुंदरकांड की चौपाइयों में छिपे संदेश को महाराज श्री ने सरल शब्दों में देते हुए कहा कि आडंबर,अभिमान,स्वार्थ से परे रह कर जो कर्मसेवा दायित्व मिला हो यह पूर्ण करना,प्रेम करुणा को किसी भी स्थिति में न त्यागने का संकल्प और निष्ठा ही जीवन
सार है।

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