भाजपा की सरकार उद्योगपतियों की है, उन्हें सब्सिडी में छूट: अटल
बिलासपुर। विधानसभा कोटा के विधायक अटल श्रीवास्तव ने कहा कि भाजपा की यह सरकार उद्योगपतियों की है। उन्हें सब्सिडी और छूट दिया जाता है। सरकार आम जनता को लूट रही है। सदन में भी इस मुद्दे को प्राथमिकता से उठाया जाएगा। राज्य सरकार द्वारा बिजली बिल बढ़ोत्तरी के आदेश के खिलाफ बुधवार को कांग्रेसियों ने बिजली कार्यालय तिफरा के सामने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि छत्तीसगढ़ न केवल अपनी जरूरत की बिजली पैदा करता है, बल्कि अन्य राज्यों को भी बिजली आपूर्ति करता है। ऐसे में प्रदेश के उपभोक्ताओं पर प्रति यूनिट 50 पैसे की अतिरिक्त वृद्धि थोपना समझ से परे है। जब बिजली उत्पादन की लागत और उपलब्धता राज्य के पक्ष में है, तो इसका लाभ आम उपभोक्ताओं को क्यों नहीं मिल रहा। बढ़ती महंगाई के बीच बिजली दरों में वृद्धि घरेलू उपभोक्ताओं, किसानों, छोटे व्यापारियों और मध्यम वर्गीय परिवारों की आर्थिक मुश्किलें और बढ़ाएगी। उन्होंने इसे जनविरोधी फैसला बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि बिजली जैसी मूलभूत सुविधा को महंगा बनाना आम जनता के हितों के विपरीत है। सरकार एक ओर सस्ती बिजली देने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर दरों में वृद्धि कर जनता पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है। जिला कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री ने कहा कि भाजपा की सरकार में 2.5 साल में 4 बार बिजली बिल में वृद्धि हुई है वही जब कांग्रेस कि सरकार थी तो 400 यूनिट तक बिजली बिल माफ किया गया था, पूरे 5 साल तक बिजली बिल में कोई वृद्धि नहीं हुई थी। प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में चेतावनी दी गई कि यदि बिजली दर वृद्धि का निर्णय वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्वरूप दिया जाएगा। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता, नागरिक, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे।
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बिजली दरों को मंजूरी दी है। इसके तहत घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक महंगी होगी। वहीं, व्यावसायिक (कॉमर्शियल) उपभोक्ताओं के लिए 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है। कृषि पंपों की बिजली दर में भी 40 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि आयोग ने बिजली कंपनी की ओर से प्रस्तावित 24 प्रतिशत वृद्धि को खारिज करते हुए औसतन 6.23 प्रतिशत बढ़ोतरी को ही मंजूरी दी है। नई दरें 1 जुलाई 2026 से लागू होंगी।


