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17 बनाम 27 सितम्बर : तानाशाही के हाईवे पर लोकतंत्र की प्रतिरोध शिला

चारण और भाटों ने कसीदे काढ़े, नई-नई उपमा और विशेषण गढ़े, “आसमां पै है खुदा (नहीं-नहीं, ईश्वर) और जमीं पै ये”– मार्का  प्रचार के तूमार खड़े करने के लिए पूरी अक्षौहिणी सेना झोंक दी, कर्ज में डूबे, दिवालिया होने की कगार पर पहुंचे सरकारी खजाने को खोलकर दरबारियों में खैरात, ईनाम- इकराम और जागीरें बँटी,

शर्म, उनको मगर, नहीं आती..!

बिलासपुर. बिलासपुर शहर के साथ स्मार्ट सिटी और पता नहीं किस किस नाम से विशेषण लगाए जा रहे हैं। लेकिन इसका पुराना विशेषण जिसमें इसे गड्ढापुर कहा गया था। आज भी इसके साथ बुरी तरह चिपका हुआ है। शहर में सड़कों की खुदाई और गड्ढों की भरमार जस की तस बनी हुई है। पहले सीवरेज