बड़े झाड़ के जंगल वन भूमि में बना दी गई हाईस्कूल

वनभूमि में काबिज ग्राम जेवरा के पट्टाधारियों को जबरिया कर दिया गया जमीन से बेदखल

ग्राम पंचायत में पारित किए गए प्रस्ताव की नहीं हुई जांच

नियम विरूद्ध बिना अनुमति दस एकड़ वन भूमि में किया गया निर्माण

बिलासपुर। ग्राम पंचायत जेवरा के तत्कालीन पदाधिकारियों ने वर्ष 2015 में एक प्रस्ताव पारित कर दस एकड़ वन भूमि बड़े झाड़ के जंगल में हाईस्कूल निर्माण की स्वीकृति करा ली गई। वन भूमि में स्कूल निर्माण के संबंध में राजस्व विभाग और जिला प्रशासन ने जांच पड़ताल भी नहीं की।

वन भूमि का मद परिवर्तन करने का नियम नहीं है, इसके बाद भी किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। जबकि ग्राम पंचायत को भी वन भूमि में निर्माण कार्य के लिए प्रस्ताव पारित करने का अधिकार ही नहीं है। स्कूल के प्राचार्य और पंचायत प्रतिनिधियों के इशारे पर वन भूमि में काबिज किसानों को बेदखल कर दिया गया है। जिस समय स्कूल का निर्माण कार्य शुरू किया गया, उस दौरान कोई दावा-आपत्ति भी प्रकाशन नहीं कराया गया है। पट्टे से मिले वन भूमि पर रह रहे एक किसान ने स्कूल प्रबंधन और पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा की जा रही मनमानी की शिकायत कलेक्टर से की है। ग्राम पंचायत जेवरा के पदाधिकारियों ने केन्द्र शासन व राज्य शासन से छलकपट करते हुए अवैधानिक प्रस्ताव वर्ष-2015 में पारित करने का षडय़ंत्र अपने निजी लाभ के लिए किया गया है। जिससे वन भूमि को शासकीय भूमि दर्शाकर अन्य पट्टेदार बाबूलाल पटेल को प्रदता भूमि पर अवैध निर्माण के माध्यम से कमीशन प्राप्त किया और बिना निविदिा के निर्माण पर शासन के राजस्व को क्षति पहुंचाई गई।

वन विभाग से नहीं ली अनुमति

स्कूल के पूर्व व वर्तमान प्राचार्य रामेश्वर जायसवाल ने स्कूल का नाम राजस्व अभिलेख में दर्ज नहीं होने के बाद भी बाऊंड्रीवाल का निर्माण कराने के लिए शासकीय भूमि में कब्जा का मिथ्या कथन न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत पटवारी प्रतिवेदन में पंचनामा में हस्ताक्षर कर प्रस्तुत किया गया। भूमि राजस्व अभिलेख में वर्तमान में वन भूमि होने की जानकारी होने पर भी बिना वन विभाग की अनुमति के स्कूल भवन बना दिया गया है।

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